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Saturday, March 22, 2014
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Congress + Communist = AAP .. See the Background Verification Of AAP
Congress + Communist = AAP .. See the Background Verification Of AAP 1.योगेंदर यादव - सोनिया गांधी की सलाहकार टीम का मेम्बर (NAC -2009-2011) योगेन्द्र यादव प्रोफाइल उनके विकिपीडिया पर उपलब्ध। देखने के लिए यहाँ क्लिक करें http://en.wikipedia.org/wiki/Yogendra_Yadav 2.मनीष सिसोदिया- सोनिया गांधी की सलाहकार अरुणा रॉय की टीम का मेंबर (RTI टीम -2005-06) http://en.wikipedia.org/wiki/Manish_Sisodia 3.गोपाल राय - कम्युनिस्ट स्टूडेंट यूनियन (AISA)की लखनऊ युनिवेर्सिटी का प्रेसिडेंट (AISA1992) http://en.wikipedia.org/wiki/Gopal_Rai 4.संजय सिंह- समाजवादी पार्टी (मुलायम सिंह यादव) कार्यकारिणी सदस्य (1998-till 2005 ) http://en.wikipedia.org/wiki/Sanjay_Singh_%28activist%29 5. प्रशांत भूषण -कम्युनिस्ट एक्टिविस्ट (नक्सलियों द्वारा भूषण को मध्यस्त बनाने कि मांग-(IBN7 on 24th April 2012 at 9:38 IST ) IBN7 द्वारा भूषण कि नक्सल मध्यस्तता कि न्यूज़ के लिए यहाँ क्लिक करें http://ibnlive.in.com/news/cant-mediate-with-naxals-on-ias-officers-abduction-prashant-bhushan/251451-3.html 6. शाजिया इल्मी-कांग्रेसी चाचा की भतीजी और जीजा आरिफ खान कांग्रेसी मंत्री रह चुके है. http://en.wikipedia.org/wiki/Shazia_Ilmi 7. अरविन्द केजरीवाल-कम्युनिस्ट एक्टिविस्ट (सोनिया गांधी कि सलाहकार अरुणा रॉय कि टीम का मेंबर (2005-06) केजरीवाल का लेफ्ट CONNECTION जानने के लिए The Sunday Gaurdian Newspaper की नीचे लिखी रिपोर्ट देखे http://www.sunday-guardian.com/analysis/is-arvind-kejriwal-on-the-left-right-or-centre साथ मैं केजरीवाल का विकिपीडिया भी नीचे देखें और जाने उनका बैकग्राउंड http://en.wikipedia.org/wiki/Arvind_Kejriwal अरुणा रॉय- सोनिया गांधी की मुख्या सलाहकार(NAC Member-2004 to till date) और केजरीवाल सिसोदिया को एक्टिविस्ट बनाने वाली। .... अरुणा रॉय ने केजरीवाल कि नौकरी छुड़वाकर उसे अपनी RTI टीम मैं शामिल किया अरुणा रॉय का विकिपीडिया भी देख लीजिये नीचे। . http://en.wikipedia.org/wiki/Aruna_Roy AAP के DNA मैं कांग्रेस + कम्युनिस्ट है, खुद जांच कर लें....Its only for your kind information... पहले पूरा लेख पढ़ें अगर सहमत हो तभी लाइक अथवा शेयर करें >>>>> मोदी का विरोध सिर्फ आर्थिक कारणों से हो रहा है, न की सांप्रदायिक कारणों से ...... जब से अमेरिका यूरोप में यह संकेत गया है की मोदी के सत्ता में आने से सरकारी तौर से भी “भारत निर्मित स्वदेशी” वस्तुओ के उत्पादन और उपयोग पर भारत की जनता द्वारा जोर दिया जायेगा, ये देश मोदी का रास्ता रोकने के लिए मोदी विरोधी शक्तिओ को खूब प्रोत्साहन दे रहे हैं. यदि सिर्फ १ साल तक जमकर विदेशी उत्पादों का बहिष्कार कर दिया जाये तो यूरोप और अमेरिका की मुद्राए रुपये के मुकाबले बहुत निचे आ जायेगे. सिर्फ यही नहीं, यूरोप दुबारा मंदी की जकड में चला जायेगा और अमेरिका यूरोप दोनों जगहों पर बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि होगी क्योकि तब भारत में सामान का उत्पादन होने से रोजगार भारत वालो को मिलेगा. आज के दिन भारत का सारा रोजगार चीन, अमेरिका और यूरोप चला गया है क्योकि हम सब लोग बाहर देशो में बना सामान खरीद रहे हैं. गुजरात दंगे का प्रचार तो सिर्फ भारत की जनता को मुर्ख बनाने के लिए बार बार किया जाता है, विदेशियों द्वारा मोदी का विरोध का सिर्फ आर्थिक कारन है. भारत में स्विट्जरलैंड के 156 गुना लोग रहते हैं और 121 करोड़ लोग दुनिया में सबसे बड़े ग्राहक है घटिया विदेशी उत्पादों के. आज भारत में 5000 विदेशी कंपनिया 27 लाख करोड़ का बिजिनेस करके हर साल 17 लाख करोड़ रुपये को डालर में बदलकर अपने देश ले जाती है जिससे रुपये निचे जा रहा है. अर्थक्रान्ति प्रस्ताव के लागू हूने की भनक भी अमेरिका को लग चुकी है जो भारत के लिए अमेरिका की कीमत कम कर देगा. मोदी और डॉ.स्वामी ने बीजेपी सरकार आने पर डालर का भाव 5 साल में 21 रुपये और 10 साल में 10/- रुपये तक लाने की सोच रहे हैं. यदि डालर 10 रुपये हो जाये तो भारत का 46 लाख करोड़ का कर्जा सिर्फ 7 लाख करोड़ ही रह जायेगा जिसे हम एक झटके में दे सकते हैं. 2013 के बजट 17 लाख करोड़ के बजट में से 5.35 लाख करोड़ सिर्फ कर्ज की किश्त देने में ही चला गया जो पुरे बजट का करीब एक तिहाई है सोचो भारत विकास कैसे करेगा. अमेरिका मोदी को किसी भी हालत में PM बनता नहीं देखना चाहता है क्योकि मोदी के पीछे सभी राष्ट्रवादी खड़े हैं. आने वाले समय में मिडिया मोदी को और भी अनदेखी करेगा और कजरी गिरोह को फोकस करके मोदी की राह रोकने की योजना पर काम करेगा. शेयर करके दूसरो को भी जागरुक करे........... AAP शिला पर चुप .. AAP रोबेर्ड वाड्रा पर चुप .. AAP हेलिकॉप्टर घोटाले पर चुप .. AAP मुज़फ्फर नगर दंगों पर चुप .. AAP चीनी घुसपैठ पर चुप .. AAP सैनिकों के सर काटने पर चुप आप पार्टी सिर्फ नरेन्द्र मोदी पर बोल रही है मतलब समझ रहें हैं ना आप ? तो फिर आप चुप क्यो हो ? आगे बढ़ाओ इसको
Friday, March 21, 2014
मंदिर में जाने से पहले आखिर क्यों बजाते है घंटी ?
मंदिर में जाने से पहले आखिर क्यों बजाते है घंटी ? हिंदू धर्म से जुड़े प्रत्येक मंदिर और धार्मिक स्थलों के बाहर आप सभी ने बड़े-बड़े घंटे या घंटियां लटकी तो अवश्य देखी होंगी जिन्हें मंदिर में प्रवेश करने से पहले भक्त श्रद्धा के साथ बजाते हैं. लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि इन घंटियों को मंदिर के बाहर लगाए जाने के पीछे क्या कारण है या फिर धार्मिक दृष्टिकोण से इनका औचित्य क्या है?असल में प्राचीन समय से ही देवालयों और मंदिरों के बाहर इन घंटियों को लगाया जाने की शुरुआत हो गई थी. इसके पीछे यह मान्यता है कि जिन स्थानों पर घंटी की आवाज नियमित तौर पर आती रहती है वहां का वातावरण हमेशा सुखद और पवित्र बना रहता है और नकारात्मक या बुरी शक्तियां पूरी तरह निष्क्रिय रहती हैं. यही वजह है कि सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है. लोगों का मानना है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है. पुराणों के अनुसार मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं. जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है. उल्लेखनीय है कि यही नाद "ओंकार" के उच्चारण से भी जागृत होता है. मंदिर के बाहर लगी घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है. कहीं-कहीं यह भी लिखित है कि जब प्रलय आएगा उस समय भी ऐसा ही नाद गूंजेगा. _/\_ आपसे नम्र निवेदन है की "हिन्दू संस्कृति" के स्वयं जिज्ञासु बने और अपने परम मित्रों को भी सनातन धर्म की जानकारी दें ....
Chai Pe Charcha-Farmers & Agrarian Crisis
Chai Pe Charcha-Farmers & Agrarian Crisis: http://youtu.be/g_2Ei8WgVuA